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Jinhe mili Unhe Qadar Nahi Jinhe

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 Allama Iqbal Shayari माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतज़ार देख औकात में रखना था जिसे  गलती से दिल में रखा था उसे  मस्जिद तो बना दी शब भर में ईमाँ की हरारत वालों ने मन अपना पुराना पापी है बरसों में नमाज़ी बन न सका बाग़-ए-बहिश्त से मुझे हुक्म-ए-सफ़र दिया था क्यूँ कार-ए-जहाँ दराज़ है अब मिरा इंतिज़ार कर Allama Iqbal Hindi Shayari अनोखी वजा हैं, सारे ज़माने से निराले हैं  ये आशिक़ कौन सी बस्ती के या रब रहने वाला हैं।  दियार-इ-इश्क़ में अपना मक़ाम पैदा कर , नया ज़माना नई सुबह-ओ-शाम पैदा कर।  अपने मन में डूब कर पा जा सुराग़-इ-ज़िंदगी, तू अगर मेरा नहीं बनता न बन, अपना तो बन।  नशा पिला के गीराना तो सब को आता है, मज़ा तो जब है के गिरतों को थाम ले साकी!! Ki Muhammed (S.A.W.) Se Wafa Tu Ne Tau Hum Tere Hain Yeh Jahan Cheez Hai Kya, Loh-o- Qalam Tere Hain. Also, Read - I Love You Shayari Sharabi Shayari Good Morning Shayari Jumma Mubarak नहीं तेरा नशेमनं कसर्-ए-शुलतानी के गुम्बद पर, तू शाहीन बसेर कर पहाडों की चट्टानो में!! Allama Iqbal Hi...